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Tuesday, April 24, 2018

April 24, 2018

Ghoomar (घूमर) song hindi lyrics. Film Padmaavat 2018

Ghoomar Song 2017 और 2018 का one of the best song। यह गाना film Padmaavat का है। जो कि 25 January 2018 में Release की गई थी। पर ये गाना बहुत पहले ही Release हो चुका था, और hit भी हो चुका था। इस film का निर्देशन Sanjay Leela Bhansali ने किया है। इस film के साथ-साथ इस गाने को संगीत देने वाले भी Sanjay Leela Bhansali ही है। इस गाने को गाने वाली गायिका का नाम Shreya Ghoshal है, और इस गाने में उनका साथ दिया है Swaroop Khan ने। जैसा कि आप जानते ही होंगे कि संजय लीला भंसाली की हर फिल्म में श्रेया घोषाल का एक गाना जरूर होता है। तो Padmaavat फिल्म में भी संजय लीला भंसाली ने, अपनी पसंदीदा गायिकाओं में से एक Shreya Ghoshal के साथ इस गाने को बनाया है। श्रेया घोषाल के साथ इस गाने में अपनी आवाज देने वाले गायक Swaroop Khan ने अपनी शुरुआत reality show Indian idol season-5 में हिस्सा लेकर की थी। और तब से ये लगातार अपनी गायकी के सफर को बनाए हुए हैं। Ghoomar Song के बोल लिखे हैं A.M Turaj ने। ये bollywood का एक बहुत ही अच्छे lyrics writers में से एक हैं। गाने के चित्रांकन की बात की जाए। तो गाने का costume, गाने का set, उस पर Deepika Padukone के खूबसूरत नृत्य (dance) ने कमाल ही कर दिया है। कुल मिलाकर कहा जाए तो यह गाना सिर्फ सुनने में ही नहीं, बल्कि देखने में भी बहुत अच्छा है।
Ghoomar-song-lyrics-in-hindi-padmaavat
गाने के बोल में एक अलग ही किस्म का प्यार है और समर्पण है। जिसे बहुत ही कम शब्दों में बयां करने की कोशिश की गई है। गाने में जो नृत्य हुआ है। वह बहुत ही अच्छा है। दीपिका पादुकोण के dance ने गाने को और भी खूबसूरत बना दिया है। हालांकि उन्होंने बहुत ही भारीे-भरकम costume पहने हुए हैं। इसके बावजूद कमाल dance कमाल का है। इस गाने में दीपिका पादुकोण के साथ-साथ Shahid Kapoor और Anupriya Goenka भी है। तो दोस्तों गाना हिंदी है। तो उसके लिरिक्स हिंदी में नहीं होनी चाहिए। तो पेश है Ghoomar Song Lyrics Hindi में।
  • Song: Ghoomar
  • Singer: Shreya Ghoshal, Swaroop Khan
  • Lyrics: A.M. Turaz
  • Music: Sanjay Leela Bhansali
  • Stars: Deepika Padukone, Shahid Kapoor and Anupriya Goyanka
  • Film: Padmaavat

Ghoomar Song Lyrics in Hindi

पलक बुहारो आँगणों
रानी सा पधराए
घूमर रमवा रे
आप पधारो सा…

आओ जी आओ घूमरड़ी खेलवाणे
पधारो सा घूमरड़ी खेलवाणे
बलम थारो घुरर घुरर घुर्रावे
आ सों म्हारो जिवड़ो घणो हिचकावे

ओ घबरावे मन में भावे
म्हारो बदीलो भँवर मन भावे
छमक छम बाजे पायल बाजै
बाईसा खेले…
झमक झमक घुँघरा बाजै
आओ सा घूमरड़ी खेलवाणे
आओ सा घूमरड़ी खेलवाणे

धनक प्रीत की सर पे ओढ़कर
घूमर घूमर घुमे
हाँ, घूमर घूमर घूमे
ओ… ललक रीत सब जग की छोड़कर
घूमर घूमर घूमे भरके
ढोला वाले ठांठ घूमर
घूमर घूमर घूमर घूमर घूमे रे
घूमर घूमर घूमे रे बाइसा
घूमर घूमे रे

हाँ… म्हारी सारी काया बोले
ढोला जी की, छाया होले
मन का घूमर जब भी डोले
सूनेपन में मेला भरके
ढोला वाले ठांठ घूमर
घूमर घूमर घूमर घूमर घूमे रे
घूमर घूमर घूमे रे बाइसा
घूमर घूमे रे

हे आओ जी, भारो पिया जी…

[थारे एहसासों की रौनक़
है म्हारी दीवली
मन महल की सारी दीवारे
थारे रंग रंगवा ली] (×2)

पाके थारा साया 
तन है जगमगाया
तारों भरी हो गयी म्हारी
सारी काली रात भरके
ढोला वाले ठांठ घूमर
घूमर घूमर घूमर घूमर घूमे रे
घूमर घूमर घूमे रे बाइसा
घूमर घूमे रे

धनक प्रीत की सर पे ओढ़कर
घूमर घूमर घुमे
ललक रीत सब जग की छोड़कर
घूमर घूमर घूमे भरके
ढोला वाले ठांठ घूमर
घूमर घूमर घूमर घूमर घूमे रे
घूमर घूमर घूमे रे बाइसा
घूमर घूमे रे

आओ जी आओ रेे घूमर खेलवाओ
आपण साथ-साथ घूमर
सगड़ा खेलवाओ
आरे लहंगो कुर्ती चुनरी
पायलिया थ्हे पहणों
हो लूमर झूमर झूमर
लूमरर झूमर थ्हे खेलो
देराणी-जेठानी खेले
सासु जी घूमरड़ी खेले
ननद-भोजाई खेले
बाइसा घूमरड़ी खेले

[घूमे रे घूमे रे घुमे घूमर घूमर घुमें
लूमे झूमे घूमे झुमे घूमर घूमर घूमे] (×2)

[लूमर घूमर घूमर घूमर
घुमर घूमर घूमर घूमे] (×4) 

Monday, April 23, 2018

April 23, 2018

मेरे पापा असली राजा। father daughter relationship Hindi story.

father-daughter-relationship-hindi-story
मेरे पापा, असली राजा पिता पुत्री पर आधारित कहानी है। ये कहानी लिखने कि जरूरत इसलिए पड़ी। क्यूंकि आज समाज में, लड़का - लड़की की जनसंख्या का असंतुलन पैदा हो गया है। और इस असंतुलन का कारण। हमारे समाज में मौजूद, वो लोग है। जो बेटा और बेटी में भेदभाव करते हैं। और उनके इस भेदभाव वाले मानसिकता के चलते ही। ये बहुत ही भयावह असुंतलन पैदा हुआ है। ये ऐसे पिता होते हैं। जिन्हे बेटी नहीं चाहिए होती। सिर्फ बेटा चाहिए होता है। इसलिए कुछ बेटियां, जन्म से पहले ही और कुछ जन्म के बाद मार दी जाती है। इनका कुसूर सिर्फ इतना होता है कि ये बेटी होती है, बेटे नहीं। पर हम ऐसे लोगों को बाप नहीं कह सकते। क्यूंकि मेरी नजर में, एक पिता कभी भी भेदभाव नहीं कर सकता। "भगवान" जिन्हें हम पिता मानते हैं। क्या उन्होंने कभी स्त्री पुरुष का भेदभाव किया ? क्या वो आदमी और औरत देखकर आशीर्वाद देते हैं ? नहीं ना। तो इंसान जब बाप बनता है। वो भेदभाव कैसे करता है ? क्यूंकि वो पिता होता ही नही। वो सिर्फ एक स्वार्थी आदमी होता है। जिसे बेटे से फायदा, और बेटी से नुकसान होता हुआ दिखाई देता है। इसलिए नुकसान से बचने के लिए। वो बेटी जन्म ही नहीं होने देना चाहते। ऐसा करने वालों में सिर्फ पुरुष ही नहीं है। बल्कि कई स्त्रियां भी भेदभाव करने वाली होती हैं। पुत्री को जन्म ना देने के पीछे भी। इनके पास कई बहाने होते हैं। जो कि एक नजर में सुनने पर सही भी लगता है। लेकिन वो सब सिर्फ एक भ्रम है। हम उन सभी भ्रम को तोड़ेंगे। लेकिन उससे पहले आप "मेरे पापा असली राजा" बाप और बेटी की हिंदी कहानी पढ़ लीजिए।

Mere papa asli raja father daughter hindi story:

पत्नी - पता नहीं क्या हो गया है हमारी बिटिया पलक को ? कल रात को खाना भी नही खाया, और रो भी रही थी। अभी सुबह जगाने गई। तो फिर से रो रही थी। वजह पूछी तो, बस इतना कहा कि please मां मुझे अकेला छोड़ दो। मुझे लगता है, शायद उसे किसी ने प्यार में धोखा दिया है। डर लगता है। कि वो खुद को नुकसान ना पहुंचा ले। पति थोड़ी खामोशी के बाद कहता है कि, "ठीक है। मैं देखता हूं।" इतना कहकर वो अपनी बेटी के कमरे में जाते है।
  • father - hello पलक! कैसी हो बिटिया?
  • daughter - please पापा! मुझे कुछ दिनों के लिए अकेला छोड़ दीजिए।
  • father - ठीक है बेटी। मगर हमारी एक शर्त है।
  • daughter- बोलिए।
  • father - बस तुम्हे एक बकवास सी कहानी सुनाना चाहता हूं। तुम सुन लो। फिर हम तुम्हे disturb नही करेंगे।
  • daughter- ठीक है सुनाइए।
पिता ने कहानी सुनना शुरू किया। "आज से करीब बीस साल पहले, एक राजा हुए करते थे। वो बहुत धनवाद थे। उनके दो बेटे थे। बड़ा बेटा बोहत आज्ञाकारी और ईमानदार था। उस राजा को अपनी बड़े बेटे पर बोहत नाज था। राजा ने अपने बड़े बेटे की शादी एक बेहद खूबसूरत लड़की से कर दी।
फिर वो लड़की गर्भवती हुई। घर में खुशियां ही खुशियां आ गई। मगर राजा कि जिद थी, कि बेटा ही हो। फिर राजा ने अपनी बहू के गर्भ का चेकअप कराया। तो पता चला कि गर्भ में लड़की है। राजा ने बेटे को हुकुम दिया कि लड़की को गिरा (abortion) दिया जाए। आखिर बड़ा बेटा तो आज्ञाकारी था ना! तो पिता की आज्ञा तो मानेगा ही ना। मगर ना जाने उस पागल बेवकूफ को क्या सुझा ? दो दिन बाद अपना राज-पाठ धन-दौलत सब छोड़ के, अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर महल से चला गया।" कहानी खत्म हो गई। इसके बाद पिता, बेटी से बोलते हैं। "सच कहूं तो वो बड़ा पागल और बेवकूफ था। कहां लोग बेटियों को बोझ समझकर गर्भ में मार देते है। और वो एक बेवकूफ़ पागल आदमी, बाप की बात मानता। तो आज राजा होता। पता नहीं आज बो बेवकूफ बेटी कि वजह से किस हालात में होगा। तभी पलक की माँ वहां आकर कहती है। "वह बेवकूफ, बेटी के लिए पागल शख्स, और कोई नहीं। ये तेरे पिताजी ही हैं। तुझे अपनी सच्ची कहानी सुना रहे है। तू कहती थी ना। मम्मी मैंने नाना-नानी को तो देख लिया। काश पाप अनाथ ना होते। तो दादा-दादी का चेहरा भी देख लेती। तेरे पापा अनाथ नही है। तेरे पापा ने ये सच इसीलिय छुपाया। कि तू दादा-दादी से मिलने की जिद ना करे बड़ी होकर। अखबार में इश्तहार देकर, तेरे दादा ने वापस बुलाना चाहा। मैंने भी कहा कि वापस चलते हैं। पर तेरे पापा ने, तुझे गोद मे उठाकर बस इतना ही कहा कि "जिस घर मे मेरी princess की हत्या का फरमान जारी किया गया हो। वहाँ एक बाप कैसे सांस ले सकता है ?"
माँ कि बात सुनने के बाद नजारा बदल गया। अब पलक की नजरों में पापा के लिए प्यार और बढ़ गया था। उनकी कुर्बानी के लिए इबादत करने का जी चाह रहा था उसका।आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मगर अब ये आंसु सिर्फ अपने पापा के लिए था। पापा ने बस आखिरी शब्द इतना ही कहा कि "मैं नहीं जानता की दुनिया तेरे बारे में क्या सोचती है ? मगर तू मेरे लिए बेहद अनमोल हो बेटी। भले ही मैं आज कहीं का राजा नहीं रहा हूं। मगर तुम कल भी, आज भी और सदा ही मेरी princess रहोगी।" बेटी ने दौड़कर अपने पापा को गले लगाया। और रोते हुए कहा "आप असली राजा हो पापा और मैं आप की princess हूं। अब एक नई शुरुआत हुई। और फिर से princess अपनी रियासत (kingdom) में लौट आई।

बेटी जन्म ना देने के बेतुके कारण।

अब अब बात करते हैं उन भ्रमों की। जिनके चलते आज भी बेटियों के जीवन की बलि चढ़ा दी जाती है।
 
ज्यादातर लोग यही बोलते हैं कि बेटियों को दहेज देना पड़ता है। जबकि दहेज देना कोई रीत नही है। पुराने ज़माने में लोग अपनी खुशी से, अपनी बेटी को शादी के तोहफे के रूप में कुछ सामान देते थे। जो कि पूरी तरह से पिता अपनी मर्जी से देते थे। लेकिन धीरे धीरे इस तोहफे को, दहेज का रूप दे दिया गया। और लोग दहेज को शादी के लिए अनिवार्य कर दिए। जिसमें कहीं भी बेटी का कोई दोष नहीं होता। फिर सजा बेटियों को क्यों ?
फिर कुछ लोग कहते हैं कि बेटा वंश बढ़ाता है। वैज्ञानिकों ने इस बात को साबित किया है। कि वंश जैसी कोई चीज़ नहीं होती। एक बच्चे में, 50% मां का, और 50% पापा का DNA होता है। तो, एक बच्चे में जितना खून बाप का होता है। उतना ही खून मां का भी होता है। तो सिर्फ बेटा ही वंश बढ़ाता है। ये बात पूरी तरह से गलत है।
कुछ लोग ये भी कहते हैं कि बेटा बुढ़ापे की लाठी होते हैं। जबकि बेटियां तो ससुराल चली जाती है। जिसे ज़िन्दगी भर पालो। वो बुढ़ापे में छोड़कर चली जाती है। तो आज जमाने में ये बात बिल्कुल बकवास है। क्यूंकि आज के जमाने में लड़का भी नौकरी करने की वजह से। मां बाप के साथ नहीं रह पाते। तो क्या फर्क हुआ बेटा और बेटी में ?
मेरे ख्याल से ये 3 ही मुख्य कारण है। जिनका नाम लेकर लोग, अपनी बच्चियों के साथ नाइंसाफी करते हैं। क्यूंकि ये तीनों ही कारण बेबुनियाद है। आज के समय में ये सब बातें। बेईमानी हो गई है।
  • वंश जैसी चीज को। वैज्ञानिकों ने गलत साबित कर दिया है।
  • दहेज जैसी भी कोई रीत कभी थी ही नही। ये बस लोगों की मुर्खता का परिणाम है।
  • आज बुढ़ापे में बेटा या बेटी। दोनों ही साथ नहीं रह पाते। क्यूंकि उन्हें करियर बनाना पड़ता है।
हम ये नहीं कह रहे कि बेटे को चाहना गलत है। बल्कि ये कह रहे हैं कि बेटे की चाह में, बेटी को मारना गलत है। ये भी एक हत्या है। आप ऐसा करके, प्रकृति के काम में दखल देते हैं। और इसी से एक लिंग असंतुलन पैदा हो गया है। और इस असंतुलन को हम ठीक कर सकते हैं। अभी भी बहुत देरी नहीं हुई है। हमें बस हमारी बच्चियों को जन्म देना है। बाकी का काम कुदरत खुद कर लेगी।
अगर आपको "मेरे पापा असली राजा। father daughter relationship Hindi story." पसंद आई हो। तो इसे औरों के साथ भी साझा (shere) करे। 

Saturday, April 7, 2018

April 07, 2018

"मेरा, मुझको ही दे रहा है" हिन्दी लघु कथा। Hindi story.

मेरा, मुझको ही दे रहा है। ये कहानी उन लोगों के लिए है। जो ईश्वर को दान दक्षिणा देकर, खुद को बड़ा भक्त समझने लगते हैं। और कुछ तो ये सोचते हैं कि भगवान को जितना ज्यादा दान देंगे। वो उतने ही ज्यादा खुश होंगे। जबकि भगवान दक्षिणा कि नहीं, बल्कि "भाव" के भूखे हैं। उन्हें सिर्फ भक्ति भाव चाहिए। ईश्वर भी हम इंसानों की तरह प्रेम का भूखा होता है, दान में मिले सामानों का नहीं। इस बात को ठीक तरह से समझाने के लिए पेश है "मेरा मुझको ही दे रहा है हिन्दी लघु कथा।

मेरा मुझको ही दे रहा है हिन्दी लघु कथा।

एक बार एक आदमी, किसी काम से मुखिया के घर आया। मुखिया जी घर में नहीं थे। तब मुखिया के नौकर ने उस आदमी को मेहमान कक्ष में बैठाया। वह आदमी ख़ाली हाथ आया था। तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा। तो उसने वहीं दीवार पर टंगी एक तस्वीर (painting) उतारी। और जब मुखिया घर आया। तो उसने वही तस्वीर मुखिया को देते हुए कहा ,यह मैं आप के लिए लाया हूं।
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मुखिया तस्वीर देखते ही पहचान गया। कि ये मेरी ही तस्वीर है। अपनी ही चीज, उस आदमी के हाथों उपहार के रूप में पाकर मुखिया सन्न रह गया। और मन में सोचा कि "कितना मूर्ख आदमी है। मेरा, मुझको ही दे रहा है।"

कथामर्म:

अब आप ही बताइए। क्या वह भेट पाकर, जो कि पहले से ही उसका है, क्या मुखिया को खुश होना चाहिए ? मेरे खयाल से नही। लेकिन यही चीज हम भगवान के साथ करते हैं। हम उन्हें फूल, फल और हर वो चीज, जो उनकी ही बनाई है। उन्हें ही दान दक्षिणा के नाम पर भेट करते हैं। और सोचते है कि इश्वर ख़ुश हो जाएगा। हम यह नहीं समझते की, उनको इन सब चीजों की जरूरत नही। दान दक्षिणा करना गलत नही है। लेकिन दान करने का जो तरीका है। वो ग़लत जरुर है। दान के नाम पर, हम सिर्फ बरबादी करते हैं। भगवान को प्रसन्न (खुश) करने के लिए। जो नियम, धर्म, कर्म बनाए गए हैं। उन सबमें कोई बुराई नही, लेकिन हम लोग उस कर्म को जैसे करते करते हैं। उसमें बुराई जरूर है।

कर्म क्या है, और हम क्या गलत करते हैं:

हर काम के पीछे कोई बड़ा कारण होता है। चढ़ावा चढ़ाने के पीछे भी बहुत बड़ा कारण है। ये नियम इसलिए बनाया गया था। कि भगवान को चढ़ाने के नाम पर, जो भी लोग चढ़ाएं। उसे गरीबों और जरूरतमदों में बांट दिया जाए। लेकिन आज ये नही हो रहा है। आज हमारा चढ़ावा, हमारी भक्ती कम, हमारा आडंबर ज्यादा हो गया है। आज कल दान कर्म से लोग अपने आप को अमीर दिखाने में जुट गए हैं। जो जितना ज्यादा अमीर होता है। वो उतना ज्यादा दान करता है। और तो और, लोग तो ये भी सोचने लगे हैं कि जितना ज्यादा चढ़ावा होगा, भगवान उतने ज्यादा प्रसन्न होंगे।

सही मायनों में लोगों को दान देने और चढ़ावा चढ़ाने का सही तरीका ही नहीं पता है।

जैसे:

  • भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उन्हें दूध का पूरा ग्लास चढ़ा देते हैं। ये जानते हुए भी कि वो सारा दूध, नाले में चला जाएगा। इसके बावजूद हम सब ऐसा करते हैं। भोलेनाथ को दूध जरूर चढ़ाएं। पर सिर्फ एक बूंद, भोलेनाथ बस इतने में ही प्रसन्न हो जाएंगे। बाकी का सारा दूध, आप किसी गरीब बच्चे को दे दीजिए। तब ये सही मायनों में चढ़ावा कहा जाएगा। क्योंकि वो गरीब बच्चा भी तो तो ईश्वर की ही संतान है। दूध नाले में जाए। उससे बेहतर है कि वो किसी के पेट में जाए। क्यूंकि दूध भी, अन्न है। और अन्न है। और अन्न का अपमान भी पाप है।
  • हम लोग चावल, दाल, फल जैसी कई खाने पीने की चीजे दान में देते हैं। वो दीजिए, पर सिर्फ 10%। बाकी का 90% आप गरीबों को दीजिए। तब जाकर ये सही मायनों में दान दक्षिणा कहलाएगा।
जिस चीज को कर के, हम खुद का भला चाहते हैं। उसी चीज के जरिए। अगर हम दूसरों का भला करेंगे। तो हमारी भलाई खुद-ब-खुद हो जाएगी। तो दोस्तों, हमें पूरी उम्मीद है कि मेरा, मुझको ही दे रहा है कहानी से बड़ी सीख मिली होगी। अंत में हम बस इतना कहेंगे कि दान दक्षिण कीजिए। पर वहां, जहां पर जरूरत हो।

Thursday, April 5, 2018

April 05, 2018

याद पर कविता - तेरी यादों का मंजर - hindi poem.

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हम सबकी जिंदगी में, एक शख्स तो ऐसा होता है। इसको हम चाहकर भी नहीं भूल सकते। वो शख्स अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी। लेकिन हम सिर्फ उस शख्स की बात करेंगे। जिसकी यादों का मंज़र इतना खूबसूरत होता है, कि उससे बाहर निकलने को जी नहीं चाहता। क्योंकी हम इस शख्स के प्यार में डूबे होते हैं। शायद इसलिए उसकी याद हमें इतनी प्यारी लगती है। ज़िन्दगी में ऐसा होता है। की जिसे हम चाहते हैं। वो हमारी ज़िन्दगी से बात दूर चला जाता है। और हमारे पास उसकी बस यादें ही रह है। हो सकता है कि प्यार में खुशियां मिली हो। या, ये भी हो सकता है, की आपको प्यार में दुख मिले हों। लेकिन फिर भी, अगर आपने सच्चा प्यार किया होगा। तो आप कभी उसे भूल नहीं पाएंगे। तो इसी बिछड़े हुए प्यार के नाम तेरी यादों का मंजर यादों पर हिन्दी कविता।

Teri Yaadon Ka Manjar Hindi Poem

तेरी प्रेम की तपिश
आज फिर हमें जला रहे हैं
जाने क्यों आज तेरी
इतनी याद आ रही है

मान लिए थे हम
कि तू निकल गया मेरे दिल से
फिर क्यों तेरी यादों की घटा
मेरे ऊपर छा रही है

इतना खूबसूरत है
तेरी यादों का मंजर
कि निकलने को जी नहीं चाहता
चलो मान लिये हम
ना चाहते हुए भी, हमें तेरी
बहुत याद आ रही है

यादों का मंजर सिर्फ प्रेमी या प्रेमिका का ही नहीं होता। बल्कि हमारे दोस्त, परिवार या स्नेहीजनों का भी होता है। जो हमसे बिछड़ जाते हैं। लेकिन उनका हमारी ज़िन्दगी से कोई तो गहरा नाता होता है। जिसके वजह से हम उनकी यादों को नहीं भूल नहीं पाते। ये हिंदी कविता आपको कैसी लगी ? Comment में जरूर बताएं।

Friday, March 16, 2018

March 16, 2018

तुमने ऐसा क्यों किया - Hindi s.ad Love story

यह कहानी रूही और समर की है। दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे और दोनों में अटूट विश्वास था। वह दोनों एक दूसरे के लिए कुछ भी कर सकते थे। रूही घरेलू थी मगर कामकाजी थी। और समर multinational company में अच्छी position पर job करता था। सारा दिन काम निपटा लेने के बाद phone पर, रूही से अपने दिल की सारी बातें करना, समर की आदत थी। और रूही भी समर को बहुत support करती थी। उसकी हर बात मानती थी और उसे प्यार से समझाती थी। समर भी रूही की हर बात को सुनता था। उसकी हर बात से खुश होता था। वह सोचता था कि वह कितना लकी है कि रूही जैसी चाहने वाली लड़की उसे मिली। सब कुछ बहुत अच्छा और खुशनुमा चल रहा था।
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लेकिन कहते हैं ना कि प्यार के मौसम में बदलाव होते हैं। और जिंदगी गम के बिना अधूरी होती है। तो यहां भी ऐसा ही हुआ। क्योंकि समर एक multinational company में अच्छी job करता था। तो उसकी चाहने वाली भी कई थी। हालांकि वो सब समर से नहीं, बल्कि उसके पैसों से प्यार करती थी। और यह बात समर भी अच्छी तरीके से समझता था। मगर फिर भी समर कभी-कभी WhatsApp में उन लड़कियों से बात कर लेता था। क्योंकि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कोई लड़की उससे प्यार करती है या नहीं। उसे ये अच्छे से मालूम था कि उसकी रूही उस पर कभी शक नहीं करेगी। इसलिए वह जी भर के, जी खोलकर, बिना किसी संकोच के, किसी भी लड़की से बात कर लिया करता था।

1 दिन उसके job में काम करने वाली एक लड़की ने उसे massage किया। लड़की का नाम अनु था।
  • अनु - hii
  • समर - hii
  • अनु - मैं तुमसे प्यार करती हूं। 
  • समर - तो मैं क्या करूं ?
  • अनु - Please मेरे पास आ जाओ। मेरे प्यार को accept कर लो।
  • समर - ऐसा नहीं हो सकता। मैं किसी और से प्यार करता हूं।
  • अनु - कौन है वो ? मुझे उसका नाम बताओ। 
  • समर - क्यों, तुम क्या करोगीे उसका नाम जानकर ? 
  • अनु - मैं उसे जाकर कहूंगी कि वो तुम्हें छोड़ दे। तो वो तुम्हें छोड़ देगी।
  • समर - हाहाहाहा… तुम उसे कहोगी कि वो मझे छोड़ दे, और वो मुझे छोड़ देगी! अफसोस हो रहा है तुम्हारी सोच पर। तुम लोगों के लिए पर सिर्फ एक खेल है ना। आज इसके साथ खेल लिया, कल उसके साथ।
  • अनु - नहीं। मैं तुमसे सच में प्यार करती हूं। मैं तुम्हें, उस लड़की से ज्यादा प्यार करूंगी। 
  • समर - हां, तुम मुझे प्यार करोगी। क्यूंकि तुमने मुझे प्यार किया है। क्यूंकि मेरे पास पैसे हैं, position है। जबकि मेरी रूही मेरे साथ तब से है। जब मैं कुछ भी नहीं था।
  • अनु - ओह! तो उसका नाम रूही है। 
  • समर - हां, रूही है। और तुम जैसी हजार लड़कियां, मिलकर भी उसकी जगह नहीं ले सकती। अभी तुम्हारी जगह रूही होती। तो 10 बार पूछ चुकी होती कि, "समर तबियत कैसी है, खाना खाया कि नहीं ?" लेकिन तुमने एक 1 बार भी जानने कि कोशिश नहीं की। यही प्यार करती हैं आप मुझसे
  • अनु - रूही भी कोई तुमसे प्यार-व्यार नहीं करती। एक बार तुम उससे कह दो कि तुम किसी और से प्यार करते हो। फिर देखना, वो तुरंत किसी और को अपना लेगी। 
  • समर - ऐसा कभी नहीं होगा। वो मुझे कभी नहीं छोड़ सकती।
  • अनु - हां तो आज़मा लो ना। कह के तो देखो कि तुम अब किसी और से प्यार करते हो। तुम देखना, वो सच में तुम्हें छोड़कर चली जाएगी, हमेशा के लिए। 

समर whatsapp बंद कर देता है। लेकिन अनु कि बातें सुनने के बाद, समर को एक शरारत सूझी। उसने सोचा कि, 'क्यों ना रूही से मजाक किया जाए कि मैं किसी और से प्यार करने लगा हूं। जरा देखूं तो, मेरी रूही क्या करती है ?'  जैसा कि उन दोनों की आदत थी हर रोज रात में एक दूसरे से phone पर बात करने की। तो आज भी दोनों रोज कि तरह ही बात करने लगे। समर ने रूही को call किया।
  • रूही - hello
  • समर - रूही, मुझे तुमसे एक बात कहनी है। (समर से इंतजार नहीं हो रहा था)
  • रूही - बात को छोड़ो, पहले ये बताओ कि तुम कैसे हो ? तबीयत ठीक है ना, खाना खाया कि नहीं तुमने ?
  • समर - मुझे तुमसे जरूरी बात कहनी है। इन बातों के लिए समय नही। (समर ने थोड़ी बेरुखी से ये बात कही)
  • रूही - क्या हुआ, ऐसी क्या बात हो गई ? (थोड़ी घबराहट और आश्चर्य के साथ)
  • समर - तुम सुन पाओगी ? (वो रूही के ज्यादा मज़े लेना चाह रहा है)
  • रूही - प्लीज जल्दी बताओ। मुझे घबराहट हो रही है। (थोड़ा डर के)
  • समर - मुझे किसी और से प्यार हो गया है। मैं अब तुमसे प्यार नही करता। (मंद हंसी के साथ)
  • रूही - ओह! (उसके पैरो तले की ज़मीन खिसक जाती है पर वो संभल कर बोलती है) देखो समर, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। यकीं मानो, तुम्हारी खुशी से बढ़कर कुछ नहीं मेरे लिए। और अगर तुम्हारी खुशी किसी और के साथ है। तो मैं तुम्हे नही रोकूंगी। वो जो कोई भी है। तुम उसके साथ खुश रहना। मेरी दुआएं तुम्हारे साथ रहेंगी, हमेशा।

इतना कहकर रूही phone रख देती है। और समर मन ही मन बहुत खुश होता है। कि उसकी रूही, उससे इतना प्यार करती है। कि उसके लिए कुछ भी कर सकती है। फिर समर ने सोचा कि कुछ दिनों तक वो रूही से बात नही करेगा। वरना रूही समझ जाएगी, कि उसने मजाक किया था उसके साथ। और इसी तरह एक हफ्ते बीत गए। रूही ने एक बार भी call नहीं किया। फिर समर ने सोचा कि 'अब मजाक बहुत हुआ। अब इसे खत्म करता हूं।' उसने रूही को call किया। रूही का call नहीं लगा। समर ने सोचा कि network problem होगी। उसने दूसरे दिन भी call किया। पर इस बार भी call नहीं लगा। तीसरे दिन भी call नहीं लगा। अब उसे घबराहट होने लगी। अब वो पूरे दिन में कई बार call कर रहा था। पर हर बार phone बंद बता रहा था। अब समर को चिंता सताने लगी कि 'क्या वाकई में रूही उससे दूर हो गई ? जैसा कि अनु ने कहा था। क्या सच में रूही ने उसे छोड़ दिया ?' समर ने रूही से सच्चा प्यार किया था। तो उसे जवाब चाहिए था। रूही से कि वो उससे बात क्यों नहीं कर रही है ? और इसलिए उसने रूही के hostel जाने का फैसला किया। चार दिनों बाद अपने काम से छुट्टी लेकर समर, रूही के hostel पहुंचता है। वहां जाने के बाद उसे पता चलता है कि रूही अब इस दुनिया में नहीं है। उसने एक हफ्ते पहले ही फांसी से लटक कर अपनी जान दे दी। ये सुनते ही समर पर मानो बिजली गिर पड़ती है। वो कुछ देर सुन्न पड़ जाता है। उसे यकीन नहीं होता कि ये क्या हो गया ? और क्यों हुआ ? वो टूटकर बिखर जाता है। उसे रूही कि सहेली ने बताया की, 'रूही ने तुम्हारे लिए एक खत छोड़ा है।' रूही ने इस खत को खास समर के लिए लिखा था। जिसे उसने अपनी सहेली को ये बताए हुए दिया था, कि अगर कभी समर यहां आए। और मैं ना रहूं। तो ये खत उसे दे देना। रूही की सहेली को भी नहीं पता था कि रूही ने वो खत उसे इसलिए दिया था। वो रूही के खत को समर के हाथ में थमा कर, दबे पांव, वहां से चली जाती है। समर वो खत पकड़े, कुछ घंटे बैठा रहता है। जब शाम होती है। तब वो बड़ी हिम्मत जुटाकर खत को खोलता है। जिसे पढ़ने के बाद, वो अपने घुटनों के बल गिर पड़ता है और फूट-फूट कर रोने लगता है। उस खत में लिखा होता है कि…

प्रिय समर
जब तुम्हे मेरी ये चिट्ठी मिलेगी। तब मैं तुमसे इतनी दूर हो जाऊंगी। कि चाहकर भी तुम मुझसे मिल नहीं पाओगे। जानती हूं। तुम्हे धक्का लगेगा। लेकिन फिर भी तुम संभल जाओगे। क्यूंकि अब तुम मुझसे प्यार नहीं करते। अगर तुम मुझसे contact करोगे भी तो, सिर्फ इसलिए, क्योंकि तुम अपने हर जान पहचान वालों की परवाह करते हो। और तुम मेरी भी फिक्र करोगे, कि मैं कैसी हूं ? बावजूद इसके कि तुम मुझसे प्यार नहीं करते। फिर भी जानने की कोशिश जरूर करोगे कि मैं कैसे रह रही हूं ? मुझे call में ना पाकर, तुम मुझे ढूंढने यहां जरूर आओगे। और तब तुम मेरा ये खत पढ़ोगे। समर, मुझे माफ़ कर देना, कि मैं ऐसा करने जा रही हूं। जो तुमने, मुझे लेकर कभी नहीं सोचा होगा। पर मैं क्या करती ? मां-बाप के गुजर जाने के बाद, मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला था। फिर तुम मेरी ज़िन्दगी में आए। तुम्हारा प्यार मुझे मिला, और फिर तुम्ही मेरी ज़िन्दगी बन गए। समर, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। अपनी ज़िन्दगी से ज्यादा, अपनी हर सांस से ज्यादा। लेकिन, अब तुम मुझे प्यार नहीं करते। यानी कि मेरी ज़िन्दगी, अब मेरी नहीं। तो बगैर ज़िन्दगी के, सिर्फ सांस लेने का क्या मतलब ?
ऐसा नहीं है कि मैंने कोशिश नहीं की तुम्हारे बगैर जीने की। पर नही समर। I can't live without you. नहीं जी सकती तुम्हारे बिना। पर मैं तुम्हारे खुशियों के आड़े नहीं आना चाहती। तुम्हारी खुशी किसी और के साथ है। इसलिए मैं तुम्हारे खुशियों के रास्ते, कभी नहीं आऊंगी। लेकिन मेरे दिल को कैसे समझाऊं ? ये है कि तुम्हे छोड़ना ही नहीं चाहता। इसलिए तुम्हारी खुशियों और मेरे दिल, दोनों के लिए मुझे एक यही रास्ता सूझा। मैं अपने मां पापा के पास जा रही हूं। हो सके तो मुझे माफ़ कर देना।
तुम्हारी रूही

समर बस सिसक सिसक कर रोता है। और बस यही कह पाता है कि "तुमने ऐसा क्यों किया, तुमने ऐसा क्यों किया" ? 

Thursday, January 25, 2018

January 25, 2018

Hawaayein song lyrics in Hindi. Movie Jab Harry Met Sejal (2017)

Hawaayein-song-lyrics-in-hindi
Jab Harry Met Sejal
Hawaayein Song, Jab Harry met Sejal film का एक बहुत ही खूबसूरत गाना है। इस फिल्म के अभिनेता Bollywood नगरी के बादशाह कहे जाने वाले Shah Rukh Khan है, और बेहद ही खबसूरत अभिनेत्री Anushka Sharma ने काम किया है। इस गाने को गायक Arijit Singh ने गाया है। और इसके बोल Irshad Kamil के हैं। और संगीत दिया है Pritam ने। इस फिल्म को निर्देशित किया है बेहद ही प्रतिभाशाली निर्देशक Imtiaz Ali ने। Irshad Kamil के बोल, Arijt Singh की आवाज और Pritam जी का संगीत मिल के इस गाने को जादुई बना डाला है। ये गाना सीधे दिल तक पहुंचाती है। और सच्चे प्यार कि गवाही देती है। तो इसी जादुई भरे गाने के Lyrics हम आपको दे रहे हैं। हमें उम्मीद है कि आपको जरूर पसंद आएगी।
Song: Hawayein
Singer: Arijit Singh, Pritam
Lyrics: Irshad Kamil
Music: Pritam 
Film Directed by: Imtiaz Ali
Music Label: Sony Music 

Hawayein hindi lyrics

तुझ को मैं रख लूं वहाँ
जहां पे कहीं, 

है मेरा यकीन
मैं जो तेरा ना हुआ
किसी का नहीं, 
किसी का नहीं
ले जाए जाने कहाँ
हवाएं, हवाएं

ले जाये तुझे कहाँ
हवाएं, हवाएं
बेगानी है ये बाघी
हवाएं, हवाएं
ले जाए मुझे कहाँ
हवाएं, हवाएं
ले जाए जाने कहाँ
ना मुझको खबर ना तुझको पता
ओ... ओ... ओ... ओ...

बनाती है जो तू 
वो यादें जाने संग मेरे कब तक चले
इन्ही में तो मेरी
सुबह भी ढले, शामें ढले, मौसम ढले
ख्यालों का शहर
तू जाने तेरे होने से ही आबाद है
हवाएं हक में
वहीं हैं आते जाते जो तेरा नाम लें
देती हैं जो सदाएं
हवाएं, हवाएं
ना जाने क्या बताएं
हवाएं, हवाएं
ले जाये तुझे कहाँ
हवाएं, हवाएं
ले जाये मुझे कहाँ
हवाएं, हवाएं
ले जाए जाने कहाँ
ना मुझको खबर ना तुझको पता
ओ... ओ... ओ... ओ...

चेहरा क्यूं मिलता तेरे 
यूं ख्वाबों से मेरे 
ये क्या राज है ?
कल भी मेरी ना थी तू 
ना होगी तू कल 
मेरी आज है 
तेरी है मेरी सारी, वफाएं वफाएं 
मांगी है तेरे लिए, दुवाएं दुवाएं 
ले जाये तुझे कहाँ
हवाएं, हवाएं
ले जाये मुझे कहाँ
हवाएं, हवाएं

[ले जाए जाने कहाँ
हवाएं, हवाएं
ले जाये तुझे कहाँ
हवाएं, हवाएं] x 2

[ले जाए जाने कहाँ
हवाएं, हवाएं
ले जाये मुझे कहाँ
हवाएं, हवाएं
] x 2
ओ... ओ... ओ... ओ...
January 25, 2018

जो तुम नहीं, तो हम नहीं। प्यार में दूरी के एहसास पर हिंदी प्रेम कविता | Hindi Love Poem

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प्यार, इश्क और मोहब्बत। ना जाने कितने सारे नाम है इसके। पर हर नाम का एक ही मतलब, एक ही एहसास है। वो एहसास, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया का सकता। वो एहसास, जिसे ना तो छुपाया जा सकता है, और ना ही बताया जा सकता है। ये एहसास, बस एक सवाल है कि क्यों ? क्यों हम उसके लिए इतने बैचैन है ? क्यों हम उससे इतना प्यार करते हैं ? जिनसे भी हम प्यार करते हैं। उसके दूर होते ही बेचैन हो जाते हैं। किसी काम में मन नहीं लगता। बस लगता है कि कब वो आए ? और उससे ढेर सारी बाते करे। तो प्यार में दूरी के इस एहसास के नाम "जो तुम नहीं, तो हम नहीं प्रेम कविता"

जो तुम नहीं, तो हम नहीं

 जाना चाहें भी दूर तुमसे 
पर दिल जा नहीं पाता है
ना जाने क्यों, तू दिल को
इतना भाता है

ख़ामोश रहते हैं लब मेरे
अश्क बातें करती है
मेरी हर एक सांस
तेरी आहें भरती है

जो तुम नहीं
तो हम नहीं
जो तुम हो
तो कोई गम नहीं

हम नहीं, पर
दिल मेरा रोता है
तू साथ नहीं पर
साथ फिर भी होता है

मेरी यादों में तू
हमेशा शामिल होता है
हम बैठे होते हैं तन्हा
जमाना महफ़िल में होता है

खैर, जिसे आप प्यार करे। उनसे किसी भी बात की, जबरदस्ती ना करे। अगर वो दूर जाना चाहे। तो जाने दें। क्यूंकि सच्चा सिर्फ प्यार देता है, जोर-जबरदस्ती नहीं करता। अगर वो आपसे प्यार करते होंगे। तो खुद कुछ दिनों बाद लौट आएंगे। हमसे प्यार करने वाला अगर दूर जाता है। तो इसके दो ही मतलब हो सकते हैं। 
  • पहला, हो सकता है कि वो किसी बात से बच रहा हो। उससे कोई गलती हो गई हो, और वो आपसे नजरे नहीं मिला पा रहा हो। इसलिए आपसे दूर भाग रहा हो। या फिर आपसे कोई गलती हो गई हो। और वो आपसे नाराज हो। इसलिए आपसे दूूर भाग रहा हो।
  • दूसरा, कि वो हमसे प्यार ही नहीं करता। क्यूंकि जिनसे हम प्यार करते हैं। उनके पास हमें सिर्फ सुकून ही मिलता है। चाहे कितना भी बड़ा तूफान क्यों ना आया हो ज़िन्दगी में। पर जिनसे हैं प्यार नहीं करते। उनसे दूर भागने का बस बहाना ही ढूंढ़ते रहते हैं। इसलिए जो जाए, वो प्यार करने वाला नहीं हो सकता।
वजह चाहे जो भी हो। इश्क में दूरी कि तड़प तो बेइंतहा होती है। ये दर्द नाकाबिल-ए-बर्दाश्त होती है। 😊