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Monday, April 23, 2018

मेरे पापा असली राजा। father daughter relationship Hindi story.

father-daughter-relationship-hindi-story
मेरे पापा, असली राजा पिता पुत्री पर आधारित कहानी है। ये कहानी लिखने कि जरूरत इसलिए पड़ी। क्यूंकि आज समाज में, लड़का - लड़की की जनसंख्या का असंतुलन पैदा हो गया है। और इस असंतुलन का कारण। हमारे समाज में मौजूद, वो लोग है। जो बेटा और बेटी में भेदभाव करते हैं। और उनके इस भेदभाव वाले मानसिकता के चलते ही। ये बहुत ही भयावह असुंतलन पैदा हुआ है। ये ऐसे पिता होते हैं। जिन्हे बेटी नहीं चाहिए होती। सिर्फ बेटा चाहिए होता है। इसलिए कुछ बेटियां, जन्म से पहले ही और कुछ जन्म के बाद मार दी जाती है। इनका कुसूर सिर्फ इतना होता है कि ये बेटी होती है, बेटे नहीं। पर हम ऐसे लोगों को बाप नहीं कह सकते। क्यूंकि मेरी नजर में, एक पिता कभी भी भेदभाव नहीं कर सकता। "भगवान" जिन्हें हम पिता मानते हैं। क्या उन्होंने कभी स्त्री पुरुष का भेदभाव किया ? क्या वो आदमी और औरत देखकर आशीर्वाद देते हैं ? नहीं ना। तो इंसान जब बाप बनता है। वो भेदभाव कैसे करता है ? क्यूंकि वो पिता होता ही नही। वो सिर्फ एक स्वार्थी आदमी होता है। जिसे बेटे से फायदा, और बेटी से नुकसान होता हुआ दिखाई देता है। इसलिए नुकसान से बचने के लिए। वो बेटी जन्म ही नहीं होने देना चाहते। ऐसा करने वालों में सिर्फ पुरुष ही नहीं है। बल्कि कई स्त्रियां भी भेदभाव करने वाली होती हैं। पुत्री को जन्म ना देने के पीछे भी। इनके पास कई बहाने होते हैं। जो कि एक नजर में सुनने पर सही भी लगता है। लेकिन वो सब सिर्फ एक भ्रम है। हम उन सभी भ्रम को तोड़ेंगे। लेकिन उससे पहले आप "मेरे पापा असली राजा" बाप और बेटी की हिंदी कहानी पढ़ लीजिए।

Mere papa asli raja father daughter hindi story:

पत्नी - पता नहीं क्या हो गया है हमारी बिटिया पलक को ? कल रात को खाना भी नही खाया, और रो भी रही थी। अभी सुबह जगाने गई। तो फिर से रो रही थी। वजह पूछी तो, बस इतना कहा कि please मां मुझे अकेला छोड़ दो। मुझे लगता है, शायद उसे किसी ने प्यार में धोखा दिया है। डर लगता है। कि वो खुद को नुकसान ना पहुंचा ले। पति थोड़ी खामोशी के बाद कहता है कि, "ठीक है। मैं देखता हूं।" इतना कहकर वो अपनी बेटी के कमरे में जाते है।
  • father - hello पलक! कैसी हो बिटिया?
  • daughter - please पापा! मुझे कुछ दिनों के लिए अकेला छोड़ दीजिए।
  • father - ठीक है बेटी। मगर हमारी एक शर्त है।
  • daughter- बोलिए।
  • father - बस तुम्हे एक बकवास सी कहानी सुनाना चाहता हूं। तुम सुन लो। फिर हम तुम्हे disturb नही करेंगे।
  • daughter- ठीक है सुनाइए।
पिता ने कहानी सुनना शुरू किया। "आज से करीब बीस साल पहले, एक राजा हुए करते थे। वो बहुत धनवाद थे। उनके दो बेटे थे। बड़ा बेटा बोहत आज्ञाकारी और ईमानदार था। उस राजा को अपनी बड़े बेटे पर बोहत नाज था। राजा ने अपने बड़े बेटे की शादी एक बेहद खूबसूरत लड़की से कर दी।
फिर वो लड़की गर्भवती हुई। घर में खुशियां ही खुशियां आ गई। मगर राजा कि जिद थी, कि बेटा ही हो। फिर राजा ने अपनी बहू के गर्भ का चेकअप कराया। तो पता चला कि गर्भ में लड़की है। राजा ने बेटे को हुकुम दिया कि लड़की को गिरा (abortion) दिया जाए। आखिर बड़ा बेटा तो आज्ञाकारी था ना! तो पिता की आज्ञा तो मानेगा ही ना। मगर ना जाने उस पागल बेवकूफ को क्या सुझा ? दो दिन बाद अपना राज-पाठ धन-दौलत सब छोड़ के, अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर महल से चला गया।" कहानी खत्म हो गई। इसके बाद पिता, बेटी से बोलते हैं। "सच कहूं तो वो बड़ा पागल और बेवकूफ था। कहां लोग बेटियों को बोझ समझकर गर्भ में मार देते है। और वो एक बेवकूफ़ पागल आदमी, बाप की बात मानता। तो आज राजा होता। पता नहीं आज बो बेवकूफ बेटी कि वजह से किस हालात में होगा। तभी पलक की माँ वहां आकर कहती है। "वह बेवकूफ, बेटी के लिए पागल शख्स, और कोई नहीं। ये तेरे पिताजी ही हैं। तुझे अपनी सच्ची कहानी सुना रहे है। तू कहती थी ना। मम्मी मैंने नाना-नानी को तो देख लिया। काश पाप अनाथ ना होते। तो दादा-दादी का चेहरा भी देख लेती। तेरे पापा अनाथ नही है। तेरे पापा ने ये सच इसीलिय छुपाया। कि तू दादा-दादी से मिलने की जिद ना करे बड़ी होकर। अखबार में इश्तहार देकर, तेरे दादा ने वापस बुलाना चाहा। मैंने भी कहा कि वापस चलते हैं। पर तेरे पापा ने, तुझे गोद मे उठाकर बस इतना ही कहा कि "जिस घर मे मेरी princess की हत्या का फरमान जारी किया गया हो। वहाँ एक बाप कैसे सांस ले सकता है ?"
माँ कि बात सुनने के बाद नजारा बदल गया। अब पलक की नजरों में पापा के लिए प्यार और बढ़ गया था। उनकी कुर्बानी के लिए इबादत करने का जी चाह रहा था उसका।आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मगर अब ये आंसु सिर्फ अपने पापा के लिए था। पापा ने बस आखिरी शब्द इतना ही कहा कि "मैं नहीं जानता की दुनिया तेरे बारे में क्या सोचती है ? मगर तू मेरे लिए बेहद अनमोल हो बेटी। भले ही मैं आज कहीं का राजा नहीं रहा हूं। मगर तुम कल भी, आज भी और सदा ही मेरी princess रहोगी।" बेटी ने दौड़कर अपने पापा को गले लगाया। और रोते हुए कहा "आप असली राजा हो पापा और मैं आप की princess हूं। अब एक नई शुरुआत हुई। और फिर से princess अपनी रियासत (kingdom) में लौट आई।

बेटी जन्म ना देने के बेतुके कारण।

अब अब बात करते हैं उन भ्रमों की। जिनके चलते आज भी बेटियों के जीवन की बलि चढ़ा दी जाती है।
 
ज्यादातर लोग यही बोलते हैं कि बेटियों को दहेज देना पड़ता है। जबकि दहेज देना कोई रीत नही है। पुराने ज़माने में लोग अपनी खुशी से, अपनी बेटी को शादी के तोहफे के रूप में कुछ सामान देते थे। जो कि पूरी तरह से पिता अपनी मर्जी से देते थे। लेकिन धीरे धीरे इस तोहफे को, दहेज का रूप दे दिया गया। और लोग दहेज को शादी के लिए अनिवार्य कर दिए। जिसमें कहीं भी बेटी का कोई दोष नहीं होता। फिर सजा बेटियों को क्यों ?
फिर कुछ लोग कहते हैं कि बेटा वंश बढ़ाता है। वैज्ञानिकों ने इस बात को साबित किया है। कि वंश जैसी कोई चीज़ नहीं होती। एक बच्चे में, 50% मां का, और 50% पापा का DNA होता है। तो, एक बच्चे में जितना खून बाप का होता है। उतना ही खून मां का भी होता है। तो सिर्फ बेटा ही वंश बढ़ाता है। ये बात पूरी तरह से गलत है।
कुछ लोग ये भी कहते हैं कि बेटा बुढ़ापे की लाठी होते हैं। जबकि बेटियां तो ससुराल चली जाती है। जिसे ज़िन्दगी भर पालो। वो बुढ़ापे में छोड़कर चली जाती है। तो आज जमाने में ये बात बिल्कुल बकवास है। क्यूंकि आज के जमाने में लड़का भी नौकरी करने की वजह से। मां बाप के साथ नहीं रह पाते। तो क्या फर्क हुआ बेटा और बेटी में ?
मेरे ख्याल से ये 3 ही मुख्य कारण है। जिनका नाम लेकर लोग, अपनी बच्चियों के साथ नाइंसाफी करते हैं। क्यूंकि ये तीनों ही कारण बेबुनियाद है। आज के समय में ये सब बातें। बेईमानी हो गई है।
  • वंश जैसी चीज को। वैज्ञानिकों ने गलत साबित कर दिया है।
  • दहेज जैसी भी कोई रीत कभी थी ही नही। ये बस लोगों की मुर्खता का परिणाम है।
  • आज बुढ़ापे में बेटा या बेटी। दोनों ही साथ नहीं रह पाते। क्यूंकि उन्हें करियर बनाना पड़ता है।
हम ये नहीं कह रहे कि बेटे को चाहना गलत है। बल्कि ये कह रहे हैं कि बेटे की चाह में, बेटी को मारना गलत है। ये भी एक हत्या है। आप ऐसा करके, प्रकृति के काम में दखल देते हैं। और इसी से एक लिंग असंतुलन पैदा हो गया है। और इस असंतुलन को हम ठीक कर सकते हैं। अभी भी बहुत देरी नहीं हुई है। हमें बस हमारी बच्चियों को जन्म देना है। बाकी का काम कुदरत खुद कर लेगी।
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